दरभंगा जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक में उठाए गए बिंदु एक बार फिर इस सच्चाई को सामने लाते हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि इन योजनाओं के कठोर क्रियान्वयन से संभव है। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने जिस तरह बीईओ, डीपीओ और जिला शिक्षा पदाधिकारी को नियमित निरीक्षण, ई-शिक्षा कोष पर ऑनलाइन उपस्थिति, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, विद्यालयों में भौतिक संसाधनों की स्थिति और U-DISE डेटा प्रविष्टि पर जवाबदेही तय की है, वह जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि उपस्थिति बनाकर विद्यालय से गायब रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी तथा सभी बीईओ द्वारा प्रतिदिन पाँच विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य करना यह दर्शाता है कि अब लापरवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2586 विद्यालयों की औचक जांच से लेकर 7025 रसोइयों की व्यवस्था तक, जिलाधिकारी का यह कदम न केवल प्रशासनिक कड़ाई दिखाता है बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों को शिक्षा, पोषण और आधारभूत सुविधाओं में कोई समझौता न हो।
शिक्षा विभाग के लिए यह बैठक एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी—चेतावनी उन कर्मियों को जो वर्षों से ढर्रे पर काम कर रहे हैं, और अवसर उन विद्यालयों के लिए जो ईमानदारी से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में जुटे हैं। यदि निर्देशों का पालन ईमानदारी से हुआ, तो दरभंगा में शिक्षा का स्तर निश्चय ही नई ऊँचाइयों को छू सकता है।





